यादगार सेक्स की भूख

सेक्स की भूख

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नो सेक्स रिलेशन स्टोरी में अमीर कपल के बीच समय के साथ सेक्स को लेकर तनाव रहने लगा. पति को रोज सेक्स की जरूरत थी पर पत्नी को अब सेक्स बोझ सा लगने लगा था.

दोस्तो, आज की कहानी का विषय मेरे एक अभिन्न मित्र द्वारा बताया गया.
बात वास्तविकता के धरातल से जुड़ी हुई है तो इस ऐज ग्रुप से गुजर रहे दोस्तों को अपनी-सी लगेगी.

नो सेक्स रिलेशन स्टोरी संजीव और नूतन की है. संजीव पायलट है और नूतन एक एयर होस्टेस.
बस दोनों की मुलाक़ात एअरपोर्ट पर होती थी.
कब इश्क हो गया पता ही नहीं चला.

दोनों के शौक बहुत मिलते जुलते थे.
दोनों को घूमने और थ्रिल का शौक था. नूतन लम्बी और छरहरी थी, सुंदर तो थी ही. संजीव भी बांका नौजवान था.

संजीव के पिता अपने जमाने के रईस थे तो खासी दौलत के मालिक थे.
संजीव और नूतन कम ही साथ हो पाते.
पर जब भी होते जिन्दगी को भरपूर जीते.

संजीव को सेक्स का बहुत शौक था.
वो नूतन से साफ़ कह देता कि आज तक उसने किसी बाहरी औरत से सेक्स नहीं किया और न ही करेगा, पर नूतन को उसका भरपूर साथ देना होगा.

नूतन अपना वादा पूरा निभाती थी.
जब भी दोनों साथ होते उनकी पहली प्राथमिकता सेक्स होती.

अब दोनों ने ही लाइफ कुछ एसी प्लान कर ली कि दोनों एक ही समय अपना ड्यूटी ऑफ लेते, वो भी अधिकतर विदेश में.

पाश्चात्य संस्कृति उनके खून में आ गयी थी.
नूतन को उन्मुक्त कपड़े पहनने का शौक था और संजीव उसे कभी नहीं टोकता.
समुद्र बीच पर तो वो नाम मात्र के कपड़े पहनते.

संजीव का बस चलता तो वो खुलेआम सेक्स करता.
उसके दिलो दिमाग पर नूतन का नग्न जिस्म हर समय हावी रहता.

नूतन यह अच्छे से जानती थी.
पर सच तो ये था कि उसे सेक्स का इतना शौक नहीं था जितना संजीव को.
वो तो बस संजीव का साथ भर देती थी.

धीरे-धीरे वक्त बदला.
संजीव ने नौकरी छोड़ दी और पिता का व्यवसाय ज्वाइन कर लिया.
उनका शहर में नामी ब्रांड का गाड़ियों का शोरूम था, खासी कमाई थी.

नूतन भी अपने व्यक्तित्व के बल पर किसी कम्पनी में एग्जीक्यूटिव बन गयी.
उसका भी अच्छा पैकेज था.

दोनों के एक ही बच्चा हुआ जो अब बोर्डिंग में पढ़ रहा था.

संजीव की रंगीनियत और बढ़ती जा रही थी.
नूतन मन मारकर भी उसका साथ देती.
कभी कभी उसे उकताहट होती पर संजीव से उसे बेइंतिहा प्यार था तो बस उसके मन की खातिर सेक्स में उसका साथ देती.

साल में एक महीना वे विदेश में निकालते.
वहां के खुलेपान में संजीव तो और ज्यादा रंगीन हो जाता.

चूँकि वहां काम का बोझ नहीं होता तो नूतन कम से कम विदेश में तो संजीव का भरपूर साथ देती.

अब उनका बेटा इंजीनियरिंग कॉलेज में आ गया था.
संजीव और नूतन भी 50 पार कर चुके थे.

नूतन का मन अब सेक्स से उचट गया था.
वो संजीव से बहाने बना कर अब सेक्स को टाल देती.

संजीव भी अब उससे इस बात से उखड़ने लगा था.
अब दोनों के बीच सेक्स को लेकर तनातनी रहने लगी.

संजीव हर दूसरी रात बेड पर नूतन के नजदीक जाने की कोशिश करता पर नूतन उसे झिड़क देती- क्या हर समय तुम्हें यही सूझता है?

संजीव तो यहाँ तक कहता- भले ही सेक्स न करो, बस मुझे हाथ लगा के सोने दो.
वो नूतन के मम्मे पकड़ कर सोना चाहता था.
पर नूतन कहती कि ऐसे मुझे नींद नहीं आती.

कभी कभी सोते-सोते नींद में संजीव नूतन के मम्मों पर हाथ फेर देता या चूत सहला देता तो नूतन उठ बैठती और संजीव को बुरा भला कहती.
बाद में संजीव के मुह फुलाने और एक दो दिन बात न करने पर नूतन भी पश्चाताप करती.
पर वो क्या करे, उसका तो मन अब सेक्स को करता ही नहीं था.

उसने सोचा भी कि किसी मनोरोगचिकित्सक को दिखाए.
पर उसे अपनी गलती कहीं नजर ही नहीं आती थी.
वो अब सोचती थी कि मेरा जिस्म है, इसे कोई भी बिना मेरी मर्जी के कैसे छू सकता है.

उधर संजीव कहता कि ये तो मेरा पति होने के नाते अधिकार है. कोई पत्नी पति की शारीरिक मांग को बिना किसी कारण के कैसे मना कर सकती है.
व नूतन को खूब समझाता, कई बार आर्टिकल्स पढ़वाता जिसमें पति पत्नी के रिश्ते का आधार नियमित सेक्स है.
पर नूतन नहीं मानती और मुंह फेर के सो जाती.

अब संजीव और नूतन की ईगो टकराने लगी थी.
कई बार जब संजीव इस बात की दुहाई देता कि उसने आज तक नूतन के अलावा किसी स्त्री पर निगाह नहीं डाली तो नूतन उसे उलाहना देती कि मैं कौन सा किसी और के साथ सोती हूँ.
वो तो यहाँ तक कह देती कि अगर संजीव चाहे तो किसी और से अपनी जिस्मानी भूख मिटा ले, उसे कोई ऐतराज नहीं.

पर संजीव एसा व्यक्ति नहीं था.
हालांकि कई बार बिजनेस टूर पर उसे मसाज ली है और हैप्पी एंडिंग तक भी बात पहुंची है.
पर किसी और से सेक्स उसकी सोच में शामिल नहीं था.
उसका लंड सिर्फ नूतन की चूत का ही दीवाना था.

मसाज में तो उसके हाथ में मसाज करने वाली लड़की के मम्मे आ ही जाते, पर उसका मन तो नूतन के मम्मे सहला कर ही भरता.

नूतन की कम्पनी में उसकी असिस्टेंट उसी की हमउम्र लड़की रोजी थी.
रोजी क्रिश्चियन थी और बेहद खूबसूरत और स्मार्ट.

बदकिस्मती से उसका और उसके पति का हाल ही में तलाक हुआ था.
रोजी के एक लड़का था जो अब अपनी पिता के साथ था.सेक्स की भूख सेक्स की भूख सेक्स की भूख सेक्स की भूख सेक्स की भूख 

रोजी बिल्कुल अकेली थी और नूतन पर पूर्णतया निर्भर थी.
नूतन भी उसकी बहुत मदद करती.

रोजी नूतन की हर बात मानती थी क्योंकि सेल्स टारगेट अचीव करने में जो इन्सेन्टिव रोजी को मिलता था वो केवल नूतन की मदद पर निर्भर था.

एक बार ऑफिस सेमीनार में नूतन और रोजी एक हफ्ते को बंगलौर गयी हुई थी.
वहां दोनों की नजदीकियां बढ़ीं.
अब दोनों आपस में बहुत खुल गयी थीं.

एक दिन रात को दोनों ने होटल रूम में जमकर पी ली और नशे में बहक गयीं.
नूतन ने महसूस किया कि रोजी आज भी सेक्स के लिए तड़पती है.
रोजी ने माना कि उसे रात को अपनी चूत में उंगली या वाईब्रेटर करना पड़ता है.

नशे में रात को दोनों लेस्बियन भी हो गयीं.

सुबह उठने पर रोजी ने तो नूतन से माफ़ी मांगी पर नूतन ने हंस कर उससे इट्स ओके कह दिया.

पर बाद में वो सोचती रही कि कल रात को वो सेक्स के लिए क्यों बहक गयी जबकि संजीव तो उससे रोज भीख सी माँगता है.

आज पहली बार उसने ये महसूस किया कि उसे संजीव के साथ सेक्स में कोई इंटरेस्ट नहीं.
अब उसे रोजी का साथ अच्छा लग रहा था.

उस रात रोजी के बार-बार मना करने पर भी नूतन ने उसे जबरदस्ती नशा करवा दिया.
आज फिर दोनों लेस्बियन हुईं जरूर पर दोनों होश में थीं.

रोजी संकोच कर रही थी तो नूतन ने कहा- मैं तुम्हारी बॉस हूँ. तुम्हारा काम मुझे खुश करना है और मेरा काम तुम्हें फायदा करवाना.
बात सोलह आने सच थी.

रोजी ने आज रात नूतन की जमकर सेवा की.
नूतन टांगें फैला कर लेट गयी तो रोजी ने उसकी चूत की फांकें फैलाकर उसे खूब चूसा.
उसने नूतन के मम्मे जम कर मसले.

दोनों ने एक दूसरे की चूत से चूत रगड़ी. नूतन का तो दो बार पानी निकल गया.
पर आज वो बहुत संतुष्ट थी.

बंगलौर से आकर उसने रोजी को एक बड़ी डील करने में मदद की.

अब तो रोजी उसकी मुरीद हो गयी.
वो नूतन की हर मांग पूरी करती गयी.

अब नूतन ने संजीव के साथ अक्सर ही एक बेड पर सोना भी बंद कर दिया था, वो अलग बेड रूम में काम का बहाना करके सोती.
उसकी जिस्म की आग अब रोजी मिटाती.

संजीव की कार कम्पनी ने उसे मालदीव्स घूमने का ट्रिप दिया.
दो लोगों का सारा खर्चा कम्पनी दे रही थी.

संजीव बहुत उत्साहित था.
नूतन ने काम का हवाला देकर जाने को मना कर दिया.
संजीव ने गुस्से में उससे कह दिया- या तो तुम नौकरी छोड़ दो या मुझे.

नूतन भी गुस्से में बोली- तुम्हें जो अच्छा लगे वो कर लो और मुझे बता देना.
टूर बन चुका था.
संजीव के पास दो टिकट थे.
वो बहुत झुंझला रहा था.

नूतन ने दिमाग दौड़ाया कि अगर रोजी को वो संजीव के साथ भेज दे तो संजीव की रोज रोज की सेक्स की टांय टांय बंद हो जायेगी. संजीव और रोजी के बीच सब कुछ तो होगा ही मालदीव्स में.
रोजी उसे सब कुछ सच सच बता देगी तो वो संजीव को ये अहसास करा सकेगी कि अब संजीव उसे सेक्स के लिए परेशान न करे.

नूतन ने रात को संजीव के नजदीक जाते हुए उससे कहा कि अगर संजीव चाहे तो वो अपनी कम्पनी की एक लड़की को उसके साथ भेज देगी. वो लड़की ऐसी नहीं है पर नूतन के कहने पर वो एक दोस्त की तरह उसका मन लगा देगी.
संजीव चिढ़ कर बोला- कोई और तुम्हारी जगह कैसे ले सकती है? और फिर मालदीव्स में मैं अकेला क्या मुठ मारूंगा या तुम्हारी सहेली की चूत मारूंगा.
नूतन हंस पड़ी और बोली- वो इतनी सुंदर और जवान है कि तुम क्या उसकी चूत मारोगे. पर हाँ वो तुम्हारा मन लगा देगी और मैं तो जा ही नहीं रही. अब अकेले जाने से किसी का साथ होना अच्छा है. तुम किसी और को ले जाना चाहो तो मुझे कोई दिक्कत नहीं. सोच लो और कल तक बता देना. मैं कल रात को रोजी को डिनर पर बुला लेती हूँ. तुम देख लेना और फिर बता देना.

संजीव ने एक लार्ज पेग बनाया बुदबुदाता हुआ ड्राइंग रूम में चला गया.
नूतन ने उसे आवाज देकर कहा- बेड पर आ जाओ, मैं तुम्हारा पेग जल्दी खाली करवा दूँगी और आज तुम्हें करने भी दूंगी.

संजीव को अपने कानों पर यकीन नहीं हुआ.
वो पलटा, नूतन मुस्कुरा रही थी.
उसने अपना गाउन उतार दिया था.
वो आज बिल्कुल नंगी थी.
उसका जिस्म और मांसल मम्मे चमक रहे थे.

संजीव लपक कर बेड पर पहुँच गया.
नूतन ने उसके हाथ से पेग ले लिया और एक सिप लेते हुए संजीव को चूम लिया और बोली- तुम भी कपड़े उतार लो.

संजीव ने फटाफट अपने कपड़े उतार फेंके और बेड पर चादर के अंदर पहुँच गया.

अब दोनों को पेग खत्म करने की जल्दी थी.
संजीव बार बार नूतन के मम्मे चूम रहा था.
उसकी उंगलियाँ नूतन की चूत की फांकों को सहला रही थीं.

नूतन को बिल्कुल मजा नहीं आ रहा था पर वो चाहती थी कि आज रात संजीव खुश होकर सो जाए ताकि कल वो रोजी के लिए हाँ कह दे.

पेग ख़त्म करके संजीव ने नूतन को होठों पर चूमा और फिर उसके मम्मे चूसने लगा.

नूतन के मन में आया कि रोज की तरह झिड़क दे संजीव को, पर आज उसे सब्र से काम करना था.
उसने संजीव के लंड को सहला दिया और काम आगे बढ़ाने की गरज से टांगें खोलते हुए संजीव से कहा- मेरी चूत चूसो.

संजीव की तो आज लाटरी गयी थी.
वो नीचे हो गया और अपनी जीभ नूतन की फांकों के बीच घुसा दी.

उसे बड़ा आश्चर्य हुआ ये देख कर कि नूतन की चूत बिल्कुल चिकनी थी, मानो आज वो तैय्यारी करके आई हो.

अब उसे क्या मालूम कि जब से नूतन बंगलोर से आई है, वो अपनी चूत अब हमेशा चिकनी ही रखती है.

संजीव की जीभ चूत की गहराइयों को नापने लगी तो नूतन पर भी नशा छाने लगा.
वो कसमसाने लगी.
उसे ऐसा लग रहा था कि रोजी उसकी चूत चाट रही हो.

उसने अपने हाथों से अपनी फांक को और चौड़ा किया.
संजीव का लंड पूरा तना हुआ था.

आज कितने दिनों बाद उसे चूत चोदने का मौक़ा मिलेगा. वरना वो तो मुठ मार मार कर ही अपना काम चला रहा था.

नूतन ने उसके बाल पकड़ कर उसे अपनी ओर खींचा और कसमसा कर बोली- ऊपर आ जाओ.

अब संजीव ने उसकी टांगें चौड़ाते हुए उसकी चूत के ऊपर अपना फनफनाता हुआ लंड रखा और एक ही झटके में अंदर पेल दिया.
अचानक हमले से नूतन की चीख निकली.
वो बोली- आराम से घुसाना चाहिए था, अब आदत नहीं रही.
संजीव हाँफते हुए बोला- अब आदत दोबारा डाल लो.

नूतन ने नीचे से उठते हुए कहा- तुम चुदाई करते रहो. ऐसी ही चुदाई मालदीव्स में रोजी की करना.

रोजी का नाम सुनते ही संजीव का उत्साह ठंडा पड़ गया.
उसने अपना लंड बाहर निकल लिया और बोला- मैं नहीं करने वाला किसी और से. तुम्हें करना है तो करो, वरना मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो.

नूतन ने मौके को समझा.
उसने संजीव को चूमते हुए उसे नीचे किया और फिर खुद उसके ऊपर बैठ गयी और अपने हाथ से उसका लंड अपनी चूत में लिया और लगी उछलने.
संजीव भी उसका साथ दे रहा था.
नूतन आज बरसों बाद चुदाई का मजा ले रही थी और संजीव को दे रही थी.

सच तो ये था कि रोजी से लेस्बियन होते होते अब उसकी भी सेक्स की इच्छा जग चुकी थी पर वो अब संजीव के साथ पता नहीं क्यों, सेक्स नहीं करना चाहती थी.
ऐसा नहीं है कि उसे कोई और पसंद था या वो किसी और मर्द से सेक्स करना चाहती हो.
पर संजीव की पहल पर उसे अच्छा नहीं लगता था.

खैर आज वो सेक्स का मजा ले रही थी.
संजीव ही उसके मम्मे मसल मसल कर लाल कर चुका था.

अब दोनों का होने को था.
नूतन के मुख से लार निकल रही थी.
हाँफते हुए वो भरभरा कर संजीव की छाती पर लुढ़क ली.

संजीव का वीर्य उसकी चूत से बाहर निकल रहा था.
नूतन ने बराबर में रखे टॉवेल से अपनी चूत साफ़ की और फिर वाशरूम चली गयी.
वह लौटी तो पूरे कपड़े पहने हुए.

चेहरे पर जबरदस्ती से लायी मुस्कान बिखेरते हुए बोली- मुझसे अब सेक्स नहीं होता. कल तुम रोजी से मिल लो. मुझे लगता है कि तुम दोनों की दोस्ती हो सकती है. मुझे कोई ऐतराज नहीं.

इतना कहकर वो मुंह फेर कर लेट गयी.
संजीव ने उसके नजदीक भी जाना चाहा तो उसे बेरुखी से कह दिया- प्लीज़ मुझे सोने दो अब!
अगली सुबह संजीव नार्मल होने की कोशिश में उसको किस करना चाहता था.
पर नूतन ने अनदेखा कर दिया और जल्दी से तैयार होने वाशरूम में घुस गयी.

ऑफिस जाते जाते वो संजीव से बोली- रात को जल्दी आ जाना, मैंने डिनर पर रोजी को बुलाया है.
संजीव बोला- मुझे कोई इंटरेस्ट नहीं है तुम्हारी सहेली क्या … किसी भी लड़की में.
नूतन बोली- कोई बात नहीं, तुम चाहो तो डिनर साथ कर लेना. आगे जैसा तुम चाहो, मैं कभी नहीं पूछूंगी.

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